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पेपर ट्रेल से लेकर रियल-टाइम डैशबोर्ड तक का सफर

पंचकुला , 20 जुलाई, 2026: सुबह के 10 बजे हैं, हरियाणा के एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय का सीन। एक टीचर कक्षा में एक कहानी को पढ़ कर सुनाती है, उसके बाद वह अपने फोन पर निपुण हरियाणा टीचर ऐप खोलकर विद्यार्थियों के लर्निंग लेवल के रिकॉर्ड को दर्ज करती है।
दोपहर में  ब्लॉक स्तर का एक मेंटर बिना बताए उसके विद्यालय में पहुंच जाता है, और वह कक्षा के पांच विद्यार्थियों का मौखिक मूल्यांकन करता है और विद्यार्थियों के लर्निंग रिकॉर्ड को अपने मोबाइल में इंस्टॉल्ड निपुण हरियाणा मेंटर ऐप पर दर्ज करता है। कुछ ही सैकंड्स में ये सारे आंकड़े ज़िला और राज्य स्तर के डैशबोर्ड पर दिखने लगते है, अर्थात् पेपर पर आने वाली रिपोर्ट्स के लिए लम्बा इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं और न ही सीखने में जूझ रहे विद्यार्थियों को सपोर्ट मिलने में किसी तरह की देरी।

यह टेक्नोलॉजी आधारित इनेबल्ड गवर्नेन्स मॉडल मतलब निपुण हरियाणा डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का कमाल है, जिसने पेपर आधारित रिपोर्टिंग को रियल-टाईम लर्निंग मैनेजमेन्ट सिस्टम में बदल दिया है, इसका संचालन अब 8000 से अधिक सरकारी विद्यालयों में तकरीबन 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों के लिए किया जा रहा है। कई स्वतन्त्र अध्ययनों से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि 70-75 फीसदी विद्यार्थी अपनी कक्षा के स्तर के अनुसार लर्निंग लक्ष्यों को हासिल कर रहे हैं। ये परिणाम राज्य द्वारा क्लासरूम में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों और शिक्षकों की ट्रेनिंग में लगातार निवेश तथा लर्निंग पर रियल टाईम में निगरानी की वजह से ही संभव हो पाए हैं।

भविष्य के लिए बना रहे मजबूत नींव :-

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने भारत के शिक्षा सुधार एजेंडा में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) को केंद्र में रखा। इसमें माना गया कि तीसरी कक्षा तक एक विद्यार्थी की ठीक से पढ़ने और गणित के बुनियादी सवाल हल करने की क्षमता ही यह तय करती है कि वह भविष्य में किस तरह से सीखेगा। इस सोच को साकार करने के लिए, शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2021 में निपुण भारत मिशन की शुरूआत की। इस समग्र एवं बहुआयामी पहल में पाठ्यक्रम, शिक्षकों की क्षमता, मूल्यांकन, अभिभावकों की भागीदारी और डेटा-आधारित प्रशासन जैसे पहलू शामिल हैं। इन सभी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर विद्यार्थी बुनियादी शिक्षा के लक्ष्यों को हासिल करे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जुलाई 2021 में निपुण भारत मिशन के लॉन्च के दौरान कहा था कि  “विद्यार्थियों को पहले पढ़ना सीखना चाहिए, इससे पहले कि वे सीखने के लिए पढ़ें।“  इसी को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानते हुए हरियाणा राज्य ने निपुण हरियाणा मिशन का लॉन्च किया, जो राष्ट्रीय विज़़न को बुनियादी लर्निंग के लिए राज्यव्यापी मुहीम में बदलता है और पिछले पांच सालों में देश के सबसे करीब से निगरानी रखे जाने वाले राज्य उन्मुख एफएलएन सुधारों में से एक बन गया है।

 

 

 

सबसे बड़ा सवालः क्या विद्यार्थी वास्तव में लर्निंग के लिए तैयार है?

पांच साल पहले हरियाणा प्रदेश के सामने गवर्नेंस की एक बड़ी चुनौती थी। 8,600 से अधिक सरकारी प्राइमरी विद्यालयों में एफएलएन का काम चल रहा था, लेकिन विभाग के पास यह जानने का कोई भरोसेमंद तरीका नहीं था कि क्या वास्तव में क्लासरूम में सुधार हो रहा है या नहीं। पेपऱ-आधारित असेसमेंट और अन्य मैन्युअल मॉनिटरिंग की वजह से हमेशा देरी होती थी, इससे विद्यार्थियों की लर्निंग मे मौजूद खामियों का पता नहीं चल पाता था और क्लासरूम में हो रही प्रगति के आधार पर ज़रूरी कार्रवाई करना लगभग नामुमकिन होता था। प्रिंटेड रिपोर्ट में लर्निंग की खामियां दिए जाने के कारण अक्सर समय पर ज़रूरी हस्तक्षेप नहीं हो पाते थे।

जैसा कि शिक्षा विशेषज्ञ अक्सर कहते हैं, जिस चीज़ को नियमित रूप से मापा नहीं जाता, उसमें निरंतर सुधार भी नहीं किया जा सकता। लेकिन सिर्फ़ मापना ही काफ़ी नहीं है,  जैसे डॉक्टर सिर्फ़ बीमारी का पता लगाकर वहीं ही नहीं रुकता, बल्कि तुरंत बीमारी का इलाज शुरू कर देता है, ठीक उसी तरह शिक्षा प्रणालियों को भी सिर्फ़ मूल्यांकन तक सीमित न रहकर समय पर शैक्षणिक सहायता देनी चाहिए। हरियाणा को इस रियल टाईम विज़िबिलिटी की ज़रूरत भी थी ताकि यह समझा जा सके कि क्लासरूम में क्या हो रहा है, कहां पर विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है, कौन से विद्यालय को मदद की ज़रूरत है।

 पेपर रजिस्टर से डिजिटल क्लासरूम तक

हरियाणा ने इसका समाधान चार कनेक्टेट टूल्स पर आधारित डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम के ज़रिए निकाला, जिसमें सबसे पहले आता है टीचर ऐप, जिसके जरिए टीचर क्लासरूम से ही सीधे असेसमेंट, उपस्थिति, साप्ताहिक प्रगति और क्लासरूम की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखते हैं। इसके बाद आता है पैरेंट ऐप, इससे विद्यार्थी के परिजन यह जान पाते हैं कि उनके विद्यार्थी की लर्निंग में क्या प्रगति हो रही है। वहीं निपुण हरियाणा डैशबोर्ड, ऊपर बताए गई सभी जानकारियों को एक साथ लाकर लाइव जानकारी देता है। इस प्रोग्राम को स्कूल, क्लस्टर, ब्लॉक, ज़िले और राज्य के अनुसार व्यवस्थित किया गया है।

रिव्यू मीटिंग के दौरान डैशबोर्ड पर दिखने वाली खामियों पर चर्चा की जाती है, उन्हें खास एक्शन पॉइंट्स में बदला जाता है, और फ़ॉलो-अप के लिए टीचर्स, मेंटर्स, विद्यालय हेड, ब्लॉक एजुकेशन ऑफ़िसर्स, डिस्ट्रिक्ट एलिमेंट्री एजुकेशन ऑफ़िसर्स और एफएलएन कोऑर्डिनेटर्स को भेजा जाता है। जहाँ पहले रिव्यू मीटिंग्स प्रिंटेड रिपोर्ट्स के आधार पर होती थीं, वहीं अब फ़ैसला लेने वाले- डैशबोर्ड पर काम करते हैं। जिससे डेटा, रिव्यू, एक्शन और वेरिफिकेशन का एक लूप बन जाता है, और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया एकतरफ़ा नहीं रहती। यह सिस्टम हरियाणा के सभी 22 ज़िलों में पूरी तरह से संचालित किया जा रहा है। हर साल यह इनको सपोर्ट करता हैः 

 

 

 

 

 

8,600+

32,000+

3.5 lakh+

शामिल सरकारी स्कूल

प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करने वाले शिक्षक

हर साल लाभान्वित होने वाले छात्र

3,000+

1.5 लाख

15,000+

 

शामिल मेंटर्स और अधिकारी

Monthly spot assessments

Monthly classroom observations


मासिक स्पॉट असेसमेंट

मासिक क्लासरूम प्रेक्षण

 

इस प्लेटफ़ॉर्म ने टीचर असेसमेंट (मूल्यांकन) में लगने वाले समय को लगभग 50 फीसदी कम कर दिया है, जबकि विद्यालय विज़िट के मामले में मेंटर्स के नियमों का पालन करने की दर 75.55 फीसदी तक बढ़ गई है।

 दोहरे मॉनिटरिंग सिस्टम से भरोसेमंद परिणाम:

हरियाणा के इस मॉडल की खासियत इसका टू-टियर असेसमेंट सिस्टम है। पहले स्तर पर, लगभग 1,500 मेंटर्स और 200 मॉनिटर्स हर महीने बिना टीचर को बताए उसकी कक्षा में स्पॉट असेसमेंट करते हैं। वे हर क्लासरूम विज़िट में रैंडम तरीके से चुने गए पांच विद्यार्थियों का छोटा सा मौखिक टेस्ट लेते हैं और हर महीने 1 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचते हैं। इसके नतीजे तुरंत ब्लॉक और ज़िला स्तर की रिव्यू मीटिंग्स में भेजे जाते हैं ताकि ज़रूरत पड़ने पर कोर्स में तेज़ी से सुधार किया जा सके।

इस लगातार चलने वाले अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम के साथ-साथ एक स्वतंत्र थर्ड-पार्टी सालाना सर्वे भी होता है। इसमें बी.एड. के प्रशिक्षित छात्र फ़ील्ड इन्वेस्टिगेटर के रूप में काम करते हैं और टैंजरीन डिजिटल असेसमेंट प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए ग्रेड 1-3 के स्टूडेंट्स का मूल्यांकन करते हैं। इस स्वतंत्र सर्वे के तीन राउंड पूरे हो चुके हैं, जिससे सालाना और निष्पक्ष जाँच का डेटा मिलता है, जिसके आधार पर हर महीने जुटाए गए डेटा को वेरिफ़ाई किया जा सकता है।

अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल:

रियल-टाइम डेटा सिस्टम और दोहरे असेसमेंट का तरीका दर्शाता है कि जब कोई राज्य डेटा का इस्तेमाल लर्निंग में सुधार के लिए करता है तो बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है। राज्य ने हर क्लासरूम को लाइव, मल्टी-लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़कर, तथा स्वतन्त्र वैरिफिकेशन के द्वारा ऐसा गवर्र्नेंस मॉडल बनाया है जिसमें समस्याओं की पहचान करके उन पर जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाती है। इससे हरियाणा के बुनियादी शिक्षा मिशन को अपने लक्ष्यों के मुताबिक प्रमाणों का मज़बूत आधार मिला है।

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