चंडीगढ़:--गुप्त नवरात्रि और सावन के आगमन के उपलक्ष्य में किन्नर समाज द्वारा मां दुर्गा की आराधना बहुत ही पवित्र, गहरी और अनूठी मानी जाती है। सेक्टर 26 में किन्नर मंदिर में भी भव्य तरीके से गुप्त नवरात्रि और सावन के पवित्र महीने में मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है। इस मौके पर महामंडलेश्वर कामिनी द्वारा यहां पर भव्य तरीके से मां दुर्गा की मूर्ति बनाकर प्रतिदिन उसकी पूजा की जाती है और प्रसाद बांटा जाता है व विशेष लंगर प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है। पूरे ट्राईसिटी में लोग बढ़-चढ़कर मां दुर्गा की आरती में शामिल होते हैं और महामंडलेश्वर किन्नर माता कामिनी जी का आशीर्वाद लोग यहां पर लेते हैं। कहते हैं माता का आशीर्वाद लेने के लिए लोग बड़े दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं और महामंडलेश्वर माता कामिनी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इस मौके पर महामंडलेश्वर माता कामिनी (कमली माता) ने बताया कि जो भी मुराद इन दोनों मांगी जाती है, माता रानी वह पूरी करते हैं। इसलिए दूर-दूर से लोग यहां विशेष पूजा करने के लिए पहुंचते हैं। किन्नरों का आशीर्वाद बहुत शक्तिशाली माना जाता है और इस विशेष समय में उनकी पूजा के कुछ खास मायने होते हैं। उन्होंने ने बताया कि गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलेंगे। वहीं सावन महीने की शुरुआत 17 जुलाई शुक्रवार से हुई है। इन दोनों का हमारे समाज मे विशेष महत्व है। गुप्त नवरात्र में मंदिर में रोजाना 23 जुलाई तक पूजा होगी। 23 जुलाई को विधिवत पूजा अनुष्ठान के साथ समापन होगा। पंजाबी और तमिल सावन महीने के उपलक्ष्य में हर शुक्रवार को विशेष पूजा पाठ होंगे। धार्मिक रीति रिवाज से सभी अनुष्ठान होंगे। हर शुक्रवार भक्तों में प्रसाद बांटा जाएगा। महामंडलेश्वर माता कामिनी ने बताया की गुप्त नवरात्रि गुप्त साधना और आंतरिक ऊर्जा (शक्ति) को जगाने के लिए समर्पित होती है। चूंकि किन्नर समुदाय का जीवन भी अक्सर समाज की मुख्यधारा से छिपा हुआ (गुप्त) होता है, इसलिए इस दौरान उनकी पूजा को मां के बहुत करीब माना जाता है। सावन का महत्व: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, और शिव व शक्ति (मां दुर्गा) एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए इस संक्रमण काल में मां की पूजा करने से आध्यात्मिक ऊर्जा और शिव-शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।किन्नर समाज और देवियाँ: मान्यता है कि किन्नरों द्वारा दी गई दुआ और उनका आशीर्वाद सीधे मां दुर्गा के आशीर्वाद के समान फलदायी होता है。इन दिनों में किन्नर समाज द्वारा की जाने वाली पूजा भक्ति, समर्पण और सामाजिक समरसता का एक बड़ा उदाहरण पेश करती है।
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