चण्डीगढ़ : आज स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय (डीएचएस), सेक्टर-34 के बाहर 180 चयनित मनोचिकित्सक अभ्यर्थियों द्वारा दिया जा रहा शांतिपूर्ण धरना लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया को बहाल करने तथा विधिवत तैयार की गई अंतिम मेरिट सूची के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों के आगू परमिंदर सिंह भुल्लर ने आज पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि
343 मनोवैज्ञानिक पदों की भर्ती प्रक्रिया बाबा फरीद स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा पूरी तरह पारदर्शी एवं मेरिट आधारित प्रक्रिया के तहत संपन्न कराई गई थी। लिखित परीक्षा, काउंसलिंग और दस्तावेज़ सत्यापन सहित सभी आवश्यक चरण पूरे किए गए तथा अंतिम मेरिट सूची भी तैयार कर ली गई। इसके बावजूद नियुक्ति पत्र जारी करने के बजाय सरकार ने भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी और साथ ही इन पदों पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती का प्रस्ताव रखा।
चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार के इस मनमाने निर्णय को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस मामले में न्यायालय ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए अगली सुनवाई तक आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियां करने पर रोक लगा दी है।
मामला न्यायालय में लंबित होने तथा बार-बार ज्ञापन और प्रतिनिधित्व देने के बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इस अनिश्चितता के कारण चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों एवं मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन रत्त अभ्यर्थियों ने दोहराया कि भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की गई थी।
चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता सिद्ध नहीं हुई है।
विधिवत पूरी की गई मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया को मनमाने ढंग से रद्द नहीं किया जा सकता।
सरकार तत्काल भर्ती प्रक्रिया बहाल करे तथा चयनित अभ्यर्थियों को बिना किसी और देरी के नियुक्ति पत्र जारी करे।
अभ्यर्थियों का यह धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और उनकी वैध नियुक्तियां बहाल नहीं की जातीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
भुल्लर ने कहा कि उनकी मांगें सरल और स्पष्ट हैं जिनमें
रद्द की गई भर्ती प्रक्रिया को तुरंत बहाल करने, अंतिम मेरिट सूची का सम्मान करने, 180 चयनित मनोवैज्ञानिकों को तत्काल नियुक्ति पत्र जारी किए जाने तथा विधिवत चयनित अभ्यर्थियों के स्थान पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती करने की प्रक्रिया बंद किया जाना आदि शामिल हैं।
परमिंदर सिंह भुल्लर ने कहा कि डब्बल एमएससी और पीएचडी डिग्री होल्डर पंजाब में रोजगार के बिना धक्के खाने को मजबूर हैं जोकि बड़ी दुखदाई बात है। महंगी पढ़ाईयां करके भी रोजगार नहीं मिल पा रहा।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक सरकार का महत्त्वाकांक्षी
युद्ध नशेयां विरुद्ध वाला अभियान मनोचिकित्सकों के बगैर सफल होना असंभव है, क्योंकि नशा छुड़ाने के लिए सिर्फ टैबलेट देना ही काफी नहीं होता। उसके लिए बाकायदा एक प्रक्रिया होती है जो बिना मनोचिकित्सकों के नहीं हो सकता। इसलिए सरकार को इस तरफ गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।
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