पंचकूला: जानलेवा हृदय रोगों से पीड़ित पंचकूला के दो बुजुर्ग मरीजों को लिवासा अस्पताल, मोहाली में सफलतापूर्वक की गई 'प्रोटेक्टेड एंजियोप्लास्टी विथ स्टेंटिंग' के बाद नया जीवन मिला।
बुधवार को पंचकूला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जानकारी देते हुए चेयरमैन-कार्डियक साइंसेज, लिवासा हॉस्पिटल्स, डॉ. हरिंदर के. बाली ने बताया कि इन जटिल प्रक्रियाओं के दौरान अस्थायी रक्त सर्कुलेटरी सहायता प्रदान करने के लिए दुनिया के सबसे छोटे मैकेनिकल हार्ट पंप 'इम्पेला' का उपयोग किया गया था।
पहले मामले में, एक 78 वर्षीय पुरुष मरीज को गंभीर 'एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन' (हार्ट अटैक) की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था। उनकी तीनों कोरोनरी धमनियों, जिनमें मुख्य बायीं धमनी भी शामिल थी, में भारी मात्रा में कैल्शियम जमा था और वे गंभीर रूप से ब्लॉक थीं।
डॉ. बाली ने कहा, "छोटे आकार के इस हार्ट पंप (इम्पेला) को जांघ की धमनी-फेमोरल आर्टरी- के माध्यम से बिना किसी सर्जरी के अंदर डाला गया। पूरी एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग प्रक्रिया एक ही बार में पूरी कर ली गई। इसमें 'लेफ्ट मेन बायफर्केशन स्टेंटिंग' और 'राइट कोरोनरी आर्टरी स्टेंटिंग' की गई। धमनियों में अत्यधिक कैल्शियम होने के कारण इस प्रक्रिया को 'ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी' (ओसीटी) नामक इंट्राकोरोनरी इमेजिंग की निगरानी में अंजाम दिया गया।"
डॉ. बाली ने बताया कि मरीज के दिल में पांच स्टेंट लगाए गए और ओसीटी के जरिए स्टेंट की सटीक स्थिति की पुष्टि की गई। दिल के स्थिर होने के बाद एंजियोप्लास्टी के अंत में पंप को निकाल दिया गया। मरीज को दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी और इलाज के दो साल बाद भी वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।
दूसरी मरीज 80 वर्षीय महिला , जिन्हें गंभीर हार्ट अटैक और 'कार्डियोजेनिक शॉक' के खतरे के चलते भर्ती कराया गया था। उनका दिल का मुख्य पंपिंग हिस्सा बायाँ वेंट्रिकल बेहद कमजोर था और दिल का बायां वाल्व लीक कर रहा था ।
डॉ. बाली ने बताया, "इम्पेला हार्ट पंप का उपयोग करके 'प्रोटेक्टेड पीसीआई' के जरिए बायीं मुख्य धमनी की एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग सफलतापूर्वक की गई। मरीज को तीन दिनों तक इम्पेला सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी, जिसके बाद धीरे-धीरे पंप को हटा लिया गया।"
डॉ. बाली ने आगे जानकारी दी कि 'प्रोटेक्टेड पीसीआई' कमजोर दिल, कई धमनियों में ब्लॉकेज या अन्य बीमारियों से जूझ रहे उच्च-जोखिम वाले मरीजों की एंजियोप्लास्टी के दौरान शरीर में रक्त परिसंचरण और कार्डियक आउटपुट को सामान्य बनाए रखता है।
उन्होंने कहा कि सही मरीजों का चयन करके यह तकनीक तब भी जटिल कोरोनरी इलाज को संभव बनाती है जब बाईपास सर्जरी का विकल्प मौजूद न हो। ऐसी जटिल प्रक्रियाओं को अंजाम देने के लिए उच्च तकनीकी विशेषज्ञता, 'हार्ट टीम' दृष्टिकोण और बहु-विशेषज्ञ समन्वय का होना बेहद अनिवार्य है।
सीईओ-लिवासा हॉस्पिटल्स, अनुराग यादव ने कहा, "हम पूरे क्षेत्र में उन्नत हृदय देखभाल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अनुभवी विशेषज्ञ टीमों, अत्याधुनिक तकनीक और मजबूत बहु-विषयक दृष्टिकोण के साथ लिवासा अस्पताल जटिल और उच्च-जोखिम वाले हृदय मामलों का इलाज करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।"
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