चंडीगढ़, 21 अगस्त, 2026: एफआईटीआईजी(फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड इन्वेस्टर गुणोदय) एसोसिएशन यानि फिटिग एसोसिएशन ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय टंडन को 'भामाशाह अवॉर्ड' से सम्मानित किया है। श्री टंडन भाजपा की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य और हिमाचल प्रदेश भाजपा के सह-प्रभारी भी हैं। उन्हें यह सम्मान सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान और सामाजिक व सामुदायिक पहलों के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता के लिए दिया गया।
टंडन को यह अवॉर्ड एफआईटीआईजी एसोसिएशन द्वारा चंडीगढ़ के किसान भवन में 'विकसित भारत 2047 की ओर: व्यापार, निवेश, युवा और विकास' विषय पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय राउंड-टेबल कॉन्फ्रेंस में प्रदान किया गया। उन्होंने इस सम्मान के लिए एफआईटीआईजी एसोसिएशन के चेयरमैन आदित्य खन्ना और लीडर्स नेटवर्क के चेयरपर्सन अमनप्रीत सिंह का दिल से आभार व्यक्त किया।
सभा को संबोधित करते हुए, टंडन ने लोकतांत्रिक और संसदीय संस्थाओं की गरिमा और प्रभावशीलता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने पूछा कि "क्या हमें लोकतंत्र चाहिए, या डेमनक्रेसी (अराजकता) और मॉबोक्रेसी (भीड़तंत्र)?"
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की ताकत बातचीत, असहमति, विचार-विमर्श और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान में निहित है, न कि व्यवधान और टकराव में।
टंडन ने सवाल किया कि क्या कुछ हज़ार लोग करोड़ों नागरिकों द्वारा चुनी गई संसद में व्यवधान डाल सकते हैं या उसे बंधक बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि लाखों मतदाताओं के जनादेश की यह जिम्मेदारी है कि संसद रचनात्मक बहस, विधायी जांच और जवाबदेह निर्णय लेने का मंच बनी रहे।
टंडन ने पूछा कि "क्या आप संसद में चर्चा और फैसले चाहते हैं, या नाटकबाजी?" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक मतभेद और असहमति लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, लेकिन उन्हें बार-बार पूरी प्रक्रिया में व्यवधान डालने के बजाय बहस और संवैधानिक तंत्र के माध्यम से व्यक्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत का बदलाव उद्देश्यपूर्ण शासन की ताकत को दर्शाता है। टंडन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के उल्लेखनीय बदलाव पर भी प्रकाश डाला और कहा कि कई क्षेत्रों में देश की प्रगति यह दिखाती है कि केंद्रित शासन, नीतिगत निरंतरता और प्रभावी निर्णय लेने से क्या हासिल किया जा सकता है। उन्होंने भारत के दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और यूपीआई के तेज़ी से विस्तार, स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ी तरक्की, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी, और इनोवेशन, डिफेंस और स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी में देश की बढ़ती क्षमताओं का ज़िक्र किया।
स्पेस के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए टंडन ने कहा कि देश के सफल मिशन और बढ़ती स्पेस क्षमताओं ने यह साबित कर दिया है कि भारत जटिल तकनीकी प्रोग्राम को पूरा करने और इस सेक्टर में एक बड़ी वैश्विक और व्यापक भूमिका निभाने के तौर पर उभरने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि स्पेस टेक्नोलॉजी में प्राइवेट भागीदारी और इनोवेशन को बढ़ावा देने वाली पहल युवा उद्यमियों, वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स के लिए नए मौके पैदा कर रही हैं।
उन्होंने सड़क और रेलवे, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल गवर्नेंस, फाइनेंशियल इनक्लूजन और एंटरप्रेन्योरशिप जैसे क्षेत्रों में हो रहे बदलावों पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ये विकास भारत के युवाओं के लिए नए मौके बना रहे हैं और 'विकसित भारत' की नींव को मजबूत कर रहे हैं।
टंडन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के लगातार विकास के लिए न सिर्फ बड़े लक्ष्य वाली नीतियां और आर्थिक विकास जरूरी है, बल्कि मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं भी ज़रूरी हैं जो सार्थक चर्चा, समय पर फ़ैसले और असरदार तरीके से लागू करने में सक्षम हों।
उन्होंने कहा कि देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पक्का करना है कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं असरदार बनी रहें और साथ ही संवैधानिक दायरे में असहमति, बहस और मतभेद को भी फलने-फूलने का मौका मिले।
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