पंचकूला, 25 जून 2026: धार्मिक दृष्टि से किसी भी अन्न भंडारे का सबसे बड़ा महत्व निस्वार्थ सेवा और श्रद्धा को दिया जाता है। केवल तिथि, नक्षत्र या योग से अधिक महत्वपूर्ण भाव, स्वच्छता, सम्मान पूर्वक भोजन परोसना और जरूरतमंदों तक भोजन पहुँचाना माना जाता है। यह बात ट्रस्ट के संस्थापक एवं समाजसेवी अमिताभ रुंगटा ने पुरुषोत्तम दास रुंगटा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा फेज़-1, इंडस्ट्रियल एरिया, पंचकूला में आयोजित 220वें अन्न भंडारे के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि अन्नदान को भारतीय संस्कृति में महादान माना गया है। जब यह सेवा निस्वार्थ भाव, समर्पण और मानवता की भावना के साथ की जाती है, तो इसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। अन्न भंडारे का उद्देश्य केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्गों तक सम्मान पूर्वक सहायता पहुँचाना भी है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने अन्न भंडारे में भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया तथा ट्रस्ट के सेवा कार्यों की सराहना की। ट्रस्ट के सदस्यों और स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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