चंडीगढ़, 30 अक्टूबर:श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के षष्ठ दिवस की कथा में आज श्रद्धालुओं ने प्रेम और विरह के भावों से ओत-प्रोत प्रसंगों का रसास्वादन किया।
कथावाचक श्रद्धेय श्री विजय शास्त्री जी महाराज ने आज के पावन प्रसंगों में गोपी गीत, भगवान श्रीकृष्ण का मथुरा गमन, गोपी-उद्धव संवाद और रुक्मिणी मंगल का दिव्य वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि “जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा के लिए प्रस्थान कर रहे थे, तब वृंदावन की भूमि विरह-वेदना से कांप उठी। गोपियों का प्रेम संसार के हर रिश्ते से ऊपर है — वह प्रेम आत्मा और परमात्मा का मिलन है।”
गोपी गीत के समय वातावरण इतना भक्तिमय हो उठा कि अनेक भक्त भावविभोर होकर अश्रुपूर्ण हो गए।
उद्धव-गोपियों के संवाद में महाराज श्री ने समझाया कि ‘भक्ति का अर्थ भगवान से मिलना नहीं, अपितु उनके वियोग में भी उन्हें स्मरण करना है।’
अंत में रुक्मिणी मंगल का प्रसंग हुआ, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी जी का अपहरण कर उनसे विवाह किया। इस प्रसंग पर पूरा पंडाल “जय जय श्री राधे श्याम” के जयघोष से गूंज उठा।
मुख्य अतिथि पार्षद श्री गुरुप्रीत गाबी जी ने मंच से भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार की कथाएं समाज में आध्यात्मिक चेतना और संस्कार जगाने का कार्य करती हैं।
राम जानकी सेवा मंडल व भाजपा मंडल अध्यक्ष श्री मुकेश शास्त्री जी ने भी कथा आयोजन समिति को इस दिव्य आयोजन के लिए बधाई दी।
कथा के अंत में भव्य भजन संध्या और प्रसाद वितरण हुआ।
सप्तम दिवस पर श्रीकृष्ण उद्धव उपदेश, द्वारका लीला व प्रभु के पृथ्वी त्याग के प्रसंग रहेंगे।
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