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धोखाधड़ी से प्रोपर्टी हथियाने वाली दम्पत्ति शहर में सक्रिय

चंडीगढ़:-चंडीगढ़ के रामदरबार निवासियों  सहित कुछ अन्य लोगों ने रामदरबार के ही एक व्यक्ति और उनके परिवार पर उन सभी से धोखाधड़ी कर उनके मकान अपने नाम करवा लेने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने जब इसकी शिकायत स्थानीय सेक्टर 31 पुलिस थाने में की तो पुलिस ने उनकी बात न सुनते हुए आरोपी पक्ष का साथ दिया। वहीं आरोपी ने अपनी उच्च पुलिस अधिकारियों सहित राजनेताओं से अपनी ऊंची पहुंच का रसूख दिखाते हुए पीड़ितों को ही धमकियां दी कि वो उसका कुछ नही बिगाड़ सकते। इंसाफ के लिए उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस के आलाधिकारियों के द्वार भी खटखटाए, पर उनकी सुनवाई नही हुई। अब वो इंसाफ की आस में मीडिया के पास आए हैं।

 चण्डीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए  रामदरबार निवासी राम सुमेर और हनुमान तथा सेक्टर 52 निवासी अशोक ने बताया कि किस प्रकार आरोपी मनोज माधव झा, उनकी पत्नी सरिता झा और पुत्र दीपक झा ने उन सबके साथ धोखाधड़ी की। राम सुमेर ने बताया कि मनोज माधव झा उन्हें एक फंक्शन में मिले थे। वहीं से उनसे मुलाकात का दौर चला। फिर उसने उसे अपनी ऊंची हैसियत और रसूख का सब्ज़बाग दिखाना शुरू किया। तब उसने उनसे उनके मकान में बतौर किराएदार रहने की बात कही। वो मान गए, तो उसने रेंट एग्रीमेंट तैयार कर उनसे साईन करने को कहा। अनपढ़ होने के चलते और विश्वास करते उन्होंने रेंट एग्रीमेंट पर दस्तखत कर दिए। लेकिन वो रेंट एग्रीमेंट नही था, बल्कि धोखे से उसने मकान की पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर ली थी। उनके साथ हुई धोखाधड़ी का जब उन्हें पता चला, तो उन्होंने मनोज माधव झा से इसके बारे में बात की तो पहले तो वो मुकर गया। ज्यादा जोर देने पर वो उल्टा मुझे ही धमकाने लगा कि तुमसे जो बन पड़ता है, करलो। तुम मेरा कुछ भी नही बिगाड़ सकते। हारकर उन्होंने इसकी शिकायत सेक्टर 31 थाना में दी। बार बार जाने पर भी पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नही की। इससे आहत हो उन्होंने आलाधिकारियों को शिकायत दी तो भी थाना पुलिस पर कोई असर नही हुआ। 
इसी तरह से हनुमान और अशोक कुमार ने भी अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उनके साथ भी मनोज माधव झा, उनकी पत्नी सरिता झा और पुत्र दीपक झा ने मीठी मीठी बातें करते हुए उनके साथ धोखाधड़ी की। अशोक ने बताया कि वो कुछ समय के लिए कहीं बाहर जा रहे थे, तो मनोज झा ने उन्हें उनके मकान की देखभाल करने का भरोसा दिलाया और कागजी कार्रवाई (एग्रीमेंट) भी बना लेने की बात कही। वो उसकी बातो में आ गए। लेकिन उनकी गैरहाजिरी में उसने मकान पर कब्जा कर लिया, जबकि एग्रीमेंट में मकान को धोखे से अपने नाम करवा लिया था। बात करने पर वो सभी उनसे लड़ने लग गए, और धमकियां देने लगे कि अब यह मकान उनका है, यहां चाहे फरियाद कर लो। 
हनुमान ने बताया कि वो खुद और मनोज झा आपस मे बिहारी होने के नाते एक दूसरे को जानते थे। मनोज झा ने उससे भी अपना बूथ किराए पर देने को कहा तो मैंने उसे किराए पर नही देने को कहा। मनोज झा इतना शातिर और चालबाज निकला कि उसने उसके बूथ के कागज पहले ही नाम होने के कागज तैयार कर लिए। एक दिन जब वो (हनुमान) कहीं बाहर गए हुए थे तो बूथ का शटर तोड़, अपना सामान रख उसपर कब्ज़ा कर लिया। जब वो वहां अपने बूथ पर पहुंचे और शटर उठा दिखा, तो उन्होंने मनोज झा से इस बाबत पूछा कि उसने किस्से पूछ कर बूथ का शटर खोला और अंदर घुसे। उस धोखेबाज ने उनसे गाली गलौज करते हुए, बूथ उसका ही होने की कही। उसने उनसे मारपीट भी की। उन्होंने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम में कॉल किया। पुलिस आई उनकी बात सुनी, बाद में थाना सेक्टर 31 से पुलिस आई और उन्हें थाने में बुलाया। वहाँ जाकर उनकी बात ही नही सुनी गई, बल्कि उन्हें ही डराया जाने लगा। हारकर उन्होंने भी आलाधिकारियों के आगे गुहार लगाई, लेकिन थाना पुलिस के अधिकारी अपने सीनियर्स के आदेश को मानते ही नही, अपराधियों को संरक्षण देते हैं।

वहीं पीड़ितों के वकील जी एस रंगी ने बताया कि आरोपी मनोज माधव झा और उसका परिवार इतने चालबाज और शातिर हैं कि सामने वाले को अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में उलझा धोखे से उनकी प्रोपर्टी हड़प जाते हैं। ऐसे अपराधी मानसिक प्रवृति वाले अपराधियों को सख्त सजा दिलाने और ठगे गए लोगों को इंसाफ दिलाने में वो कोई कसर नही छोड़ते। वो यह केस पूरी मुखरता से कोर्ट में लड़ रहे है, जल्द ही आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।


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