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सॉल्युबल फर्टिलाइज़र बनाने का पायलट प्रोजेक्ट रिकॉर्ड टाइम में हुआ पूरा

चंडीगढ़, 21 जनवरी:- ऐसे समय में जब चीन ने दुनिया भर में स्पेशल फॉस्फेट फर्टिलाइज़र के एक्सपोर्ट पर बैन 2026 तक बढ़ा दिया है, भारत ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारत में सॉल्युबल फर्टिलाइज़र पायलट प्लांट का पहला फेज़ सफलतापूर्वक चालू हो गया है। इसका उद्घाटन जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिज़ाइन सेंटर के डायरेक्टर डॉ. अनुपम अग्निहोत्री ने किया।

यह पायलट फैसिलिटी:- J.N.A.R.D.C. द्वारा फंडेड रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत तय समय से लगभग एक महीने पहले पूरी हो गई है। इस कामयाबी को भारत में स्पेशल और वैल्यू-एडेड फर्टिलाइज़र की स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे देश में सभी बड़े सॉल्युबल फर्टिलाइज़र का प्रोडक्शन हो सकेगा, जिन्हें अब तक दूसरे देशों से इंपोर्ट किया जाता था।

अगले फेज में इस पायलट प्लांट को बड़े लेवल पर बढ़ाया जाएगा, जिसे देश की आने वाली फर्टिलाइजर कंपनियों द्वारा अपनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे न सिर्फ इंपोर्ट पर डिपेंडेंस कम होगी, बल्कि रोजगार के मौके भी मिलेंगे, टेक्नोलॉजिकल आत्मनिर्भरता का फायदा मिलेगा और लागत में कमी आएगी। मिनिस्ट्री ऑफ माइंस के तहत आने वाली नोडल एजेंसी JNARDDC, जरूरी मिनरल्स समेत कई स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स में स्वदेशी रिसर्च और डेवलपमेंट को लगातार बढ़ावा दे रही है। इशिता इंटरनेशनल द्वारा डेवलप की गई यह ग्रीन टेक्नोलॉजी, जो खास घुलनशील फर्टिलाइजर्स के प्रोडक्शन के लिए डिजाइन की गई है, अप्रैल में JNARDDC के सहयोग से लॉन्च की गई थी और रिकॉर्ड टाइम में लैब से पायलट स्केल तक स्केल-अप दिखाता है कि देश में इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट से स्वदेशी टेक्नोलॉजी डेवलप की जा रही हैं।

यह स्कीम भारत को फर्टिलाइजर सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत बेस देती है और भविष्य में दूसरी स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट का रास्ता दिखाती है।

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