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श्री पेरिया नाज़गी अम्मल टेम्पल /काली माता मंदिर धनास में 22 फरवरी- रविवार को हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा महाशिवरात्रि पर्व

चंडीगढ़:--श्री पेरिया नाज़गी अम्मल टेंपल/ काली माता मंदिर धनास में माता के दिव्य आशीर्वाद से महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर धनास के फारेस्ट एरिया में स्थित काली माता मंदिर में शिवरात्रि का पर्व 22 फरवरी 2026- रविवार को बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा। यह जानकारी श्री पेरिया नाज़गी अम्मल टेंपल मैनेजिंग कमेटी (रजिस्टर्ड) 2686[.1997] और मंदिर की महिला मंडली द्वारा आज यहां मंदिर में एक प्रेस वार्ता के दौरान दी गई।

महाशिवरात्रि पर्व महोत्सव के समारोह के आयोजन को लेकर और अधिक विस्तृत जानकारी देते हुए आर वेलु अध्यक्ष,ने बताया कि महोत्सव के आयोजन को लेकर आज एक मीटिंग आयोजित की गई थी। जिसमे धनास के फारेस्ट एरिया में स्थित काली माता मंदिर में महोत्सव की व्यवस्था और तैयारियों को लेकर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव की शुरुआत –15 फरवरी, 2026 से सुबह से ही हो जाएगी। मंदिर में नीलकंठ, भगवान शिव की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान से की जाएगी। इसके बाद 8वें दिन 22 फरवरी 2026 रविवार को मयाना कोल्लाई उत्सव होगा। इन आठ दिनों मे मन्दिर में महाशिवरात्रि पर्व में पूजा अर्चना जारी रहेगी और फिर 22 फरवरी को महा उत्सव होगा, जो सुबह से शुरू होकर रात्रि 10 बजे तक चलेगा। उन्होंने बताया कि महा उत्सव के दिन तमिल श्रद्धालुओं द्वारा जीभ और गाल में त्रिशूल आरपार के शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।

उन्होंने आगे बताया कि मीटिंग के दौरान मंदिर की  भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की गई। जो निम्न प्रकार से है:-

- हमारी समिति में और सम्मानित महिला सदस्यों को शामिल किया जाएगा।
- एक अलग युवा विंग का गठन किया जाएगा।
- दोनों विंग समिति के साथ समन्वय में काम करेंगे।
- मंदिर की आध्यात्मिक गतिविधियों, पूजा, उत्सव, सेवा गतिविधियों और मंदिर से संबंधित सभी कार्यों के लिए अलग-अलग विभाग बनाए जाएंगे।
- इन संरचनाओं को स्थापित करने के आदेश और प्रस्ताव समिति द्वारा औपचारिक रूप से पारित किए जाएंगे।


मंदिर के इतिहास के बारे में:-
हमारे श्री पेरिया नाज़गी अम्माल टेंपल का इतिहास बहुत गौरवशाली है। 09. 06.1966 को, अम्मन की पवित्र मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा
पुजारी तिरु. पेरियासामी अय्या और उनकी पत्नी अम्मा रेंगम्मल ( स्वर्गवासी) द्वारा की गई थी। उनके साथ, उनके पैतृक गाँव आसनूर के कोथुक्कारार (कर दाता), उनकी बेटियाँ और परिवार के सदस्य, साथ ही अन्य गाँवों के कोथुक्कारार, उनकी बेटियाँ, परिवार के सदस्य और तमिल भक्त सभी एक साथ आए और सभी की एकता और सहयोग से, हमारे मंदिर की स्थापना हुई – जो एक महान ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

इसके बाद, अम्मन की कृपा से, मंदिर का विकास किया गया और उसे एक मंदिर के रूप में बनाया गया, और आज तक, रोज़ाना पूजा लगातार की जा रही है।



 

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